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महाविद्यालय की मृदा विज्ञान प्रयोगशाला में रखी मिली सागौन के कटे पेड़ की लकड़ी

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अतर्रा (बाँदा )| महाविद्यालय के कृषि संकाय की मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन प्रयोगशाला में सागौन के कटे पेड़ की लकड़ी रखी हुई मिलने से छात्रों ने बवाल मचा दिया, वन विभाग को शिकायत भेज मौके पर वन दरोगा को बुला जांच कराईऔर कॉलेज प्रशासन पर हरे पेड़ काटने का आरोप लगाया| वहीं महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ पीके विश्वकर्मा ने मामले को करीब सात आठ माह पुराना बताया और कहा कि कोई भी नया पेड़ कॉलेज परिसर में नहीं काटा गया है उक्त प्रकरण का मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है इसलिए लकड़ी को सुरक्षित रखा गया है |
    प्राप्त जानकारी के अनुसार पूर्व छात्र नेता नीरज द्विवेदी, इंद्र प्रसाद त्रिपाठी, विकास दीक्षित, रोहित शुक्ला,प्रवीण कुमार एवं सनी आदि नें शुक्रवार के दिन वन विभाग के दरोगा ओमप्रकाश सेक्शन इंचार्ज अतर्रा को शिकायत भेज कर बताया कि अतर्रा महाविद्यालय के कृषि संकाय की मृदा विज्ञान प्रयोगशाला के अंदर प्रतिबंधित सागौन के कटे पेड़ों की लकड़ी रखी हुई है | शिकायत पर वन दरोगा ओमप्रकाश शिकायतकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंचे और वर्तमान प्राचार्य डॉ पी के विश्वकर्मा की उपस्थिति में प्रयोगशाला को खुलवाया गया जहां पर सागौन के कटे पेड़ों की लकड़ी रखी हुई थी|मौके पर उपस्थित कृषि संकाय के शिक्षक डॉ संजय श्रीवास्तव एवं डॉ प्रमोद द्विवेदी का कहना था कि 7-8 माह पहले महाविद्यालय में कुछ निर्माण कार्य कराए जाने के कारण उस जगह पर लगे कुछ पेड़ों को काटा गया था जिसकी शिकायत हुई थी और जाचोपरान्त तत्कालीन प्राचार्य डॉ जेपी शुक्ला पर मुकदमा दर्ज हुआ था उस मुकदमे से संबंधित लकड़ी वक्त जरूरत एवं जांच पड़ताल के लिए प्रयोगशाला में सुरक्षित रखवा दी गई थी जो कुछ दिन पहले बाहर रखी थी| वन दरोगा ओमप्रकाश ने बताया कि प्रयोगशाला में रखी हुई लकड़ी 15 से 1 महीने के समय अंतराल में काटी गई समझ में आ रही हैं जबकि वर्तमान प्राचार्य डॉपीके विश्वकर्मा का कहना है कि वही पुरानी लकड़ी है जो पहले बाहर रखी थी बाद में प्रयोगशाला में रखवा दी गईं ताकि कहीं इधर-उधर ना हो |उक्त कटी लकड़ी तत्कालीन प्राचार्य डॉ जी पी शुक्ला के आदेश पर प्रयोगशाला में रखी गई थी वर्तमान में हरे पेड़ काटने जैसी कोई घटना नहीं हुई और ना ही कोई हरा पेड़ कॉलेज परिसर में काटा गया है | छात्रों के द्वारा लगाया गया यह आरोप वर्तमान में पूरी तरह निराधार है की कॉलेज द्वारा हरे पेड़ कटवाए जा रहे हैं!

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